अपेंडिक्स क्या होता है?


समान रूप से यह एक प्रकार का वेस्टिजियल अंग है जो मनुष्‍य के छोटी और बड़ी आंत के जोड़ पर हीं पाया जाता है। यह वेस्टिजियल अंग का अर्थ है ऐसा कोई अंग जिसका हमारे शरीर के लिए ऐसा कोई महत्व नहीं रखता हो। 



अपेंडिक्स क्या होता है?




यानी कि हम इस अंग के बिना भी सामान्य जीवन आसानी से जी सकते हैं। यह एक प्रकार का केंचुए के आकार के हीं  जैसा होता है। और इसकी लंबाई भी क्रमश: 7 से 10 सेंटीमीटर तक हीं होती है।

इससे क्यों होती है पेट में सूजन?


इस तरह की बिमारी में यानी अपेंडिक्स में इस तरह की सूजन को हीं अपेंडिसाइटिस माना गया है। यह मुख्‍यत: सिर्फ दो कारणों से हीं होती है। पेट में  इंफेक्शन के कारण एवं  दूसरा कारण अपेंडिक्स में अगर कुछ फंसने गया हो तब।

अपने खाने के डाइट में किसी फाइबरयुक्त पदार्थों की कमी का होना भी इसका एक मुख्य कारण होती है। 

मनुष्‍य के आंत के कैंसर के कारण से भी यह अपेंडिसाइटिस हो जाता है। हम बता दें कि यह समस्याएं किसी व्‍यक्ति को किसी भी उम्र में हो जाती है, लेकिन ऐखा देखा गया है कि समान्‍यत: 10 से 30 वर्ष की उम्र के लोगो में ज्यादा होती है।

सूजन के क्‍या हैं लक्षण अपेंडिक्स मैंं  


इस बिमारी का सबसे बड़ा संकेत होता है कि मनुष्‍य के पेट के दाहिनी तरफ निचले हिस्से में दर्द होने की समस्‍या का होना। पर यह दर्द प्राय: मनुष्‍य के नाभि के आसपास हीं  शुरू होता है और उसके बाद में हीं दाहिनी तरफ पहुंचता है।

इससे जो दर्द होती है वह मामूली से लेकर अत्यंत हीं बहुत असहनीय एंव पीड़ादायक भी हो सकता है। इस प्रकार का दर्द मनुष्‍य के खांसने एवं हंसने पर अधिक बढ़ जाता है। और औरतो में यह प्रेग्नेंसी के वक्‍त भी इसका दर्द जनानी के पेट के ऊपरी हिस्से में भी हो सकता है।

प्राय: पेट दर्द के अलावा इसमें से कोई एक लक्षण भी देखा जा सकता है या हो सकता है – जैसे में पेट का फूलना, उल्टियों का होना, अपच, और जी का मिचलाना, भूख का ना लगना, कब्जियत होना, पेशाब में जलन होना और कभी-कभार खून भी आ जाना, मनुष्‍य के चलने में परेशानी होना इत्‍यादि।

ये लक्षण किसी में दिखें तो क्या करना चाहिए?


अगर आपमें से किसी को भी यह लक्षण या जटिलता के होने अनुभव हो तुरंत अपने न‍जदिक के किसी डॉक्टर या सर्जन से संपर्क जरूर करें। जब आप डॉक्टर के पास अपेंडिसाइटिस की पुष्टि के लिए अपना ब्लड टेस्ट, या यूरिन टेस्ट और सोनोग्राफी करवाया जा सकता है। 

या अत्‍यधिक जरूरत पड़ने पर डॉक्‍टर आपको सीटी स्केन और एमआरआई भी करवाने के लिए भी कह सकता है। अगर आपके अपेंडिक्स में डॉक्‍टर सूजन की पुष्टि करता है, तब उस मरीज का तुरंत हीं ऑपरेशन करवाना बेहद हीं जरूरी हो जाता है।

हम बता दें कि अपेंडिक्स जैसे बिमारी का स्थाई इलाज सिर्फ ऑपरेशन होता है। डॉक्‍टर के द्वारा मरीज का ऑपरेशन करके अपेंडिक्स को निकाला जाता है। 

अगर कोई ग्रस्‍त रोगी के ऑपरेशन नहीं करवाता है तब उसके अपेंडिक्स में लगातार बार-बार सूजन आने की समस्‍या का खतरा बन जाता है और इसके पेट में भी फूटने की आशंका अधिक बढ़ जाती है।

रोगी के अपेंडिक्स के फूट जाने पर इसका इंफेक्शन रोगी के पूरे पेट में भी फैल जाता है, तब यह और भी जानलेवा सिद्ध हो सकता है रोगी के लिए।

क्‍या है ऑपरेशन की विधि इस बिमारी में


अपेंडिक्‍स में ऑपरेशन दो को विधि प्रमुख है- जिसमें ओपन सर्जरी एवं लेप्रोस्कोपिक तथा दूरबीन पद्धति के द्वारा- इनमें से किसी के जरिए भी इसका इलाल करवाया जा सकता है। लैकिन आजकल बहुत ही ज्‍यादा लोकप्रिय लेप्रोस्कोपिक विधि है जो कि सर्वाधिक चलन में है, इससे छोटे-छोटे चीरों के जरिए ऑपरेशन किया जाता है।

लेप्रोस्कोपिक पद्धति में मरीज का ऑपरेशन करने पर दर्द काफी कम हो जाता है, लेकिन दवाओं का उपयोग इसमें काफी कम हो जाता है, और मरीज को अस्पताल से बहुत हीं जल्दी छुट्टी भी हो जाती है एवं मनुष्‍य जल्द ही अपने कार्य एवं अपने सामान्य जीवनशैली में वापस आ जाता हैं। 

लैकिन कोन सी और किस पद्धति से द्वारा ऑपरेशन होना है, इसका बेहतर निर्धारण डॉक्‍टर और सर्जन ही करता है। और यह रोगी की शारीरिक स्थिति और उसकी उम्र को घ्‍यान में रखकर कोन सी ऑपरेशन पद्धति की सलाह उचित होगी मरीज के लिए यह डॉक्‍टर बता देता है।
  
 

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