Swami vivekananda का और swami vivekananda jyanti, swami vivekananda speach,के बारे में जानते हैं, की स्वामी विवेकानंद कैसे बनें।

आइए जानते हैं कि ” नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद” कैसे बने, उनसे जुड़ी कुछ सत्य तथ्य के बारे में बताना चाहेंगे कि कैसे स्वामी विवेकानंद की बायोग्राफी इन हिंदी में लिखी गई। swami vivekananda quotes के बारे में और swami vivekananda scholarship के बारे में भी आप जाना चाहते ही होंगे।

Swami vivekananda vivekananda jyanti and Speach
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राष्ट्रीय युवा दिवस : स्वामी विवेकानंद जयंती 12 जनवरी 2020 को मनाया जाता है।

विवेकानंद स्वामी  के जन्मदिन को ही राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को गौड़ मोहन मुखर्जी स्ट्रीट,कोलकाता में हुआ था। उस दिन हिन्दू कालदर्शक के अनुसार संवत् 1920 की मकर सक्रांति का दिन था।

रामकृष्ण परमहंस ( 1836-1886ई. ) का नाम कैसे पड़ा

रामकृष्ण परमहंस 1836- 1886 ई. कोलकाता के समीप स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी थे। उनका प्रारंभिक नाम गदाधर भट्टाचार्य था, शंकर विधान से समृद्धि तोतापुरी ने उन्हें दीक्षित कर रामकृष्ण का नाम दिया।

उस समय के प्रायः सभी धर्म – सुधारकों ने ( केशव चंद्र सेन और दयानंद) रामकृष्ण से शिक्षा प्राप्त की। रामकृष्ण के उपदेशों के प्रचार तथा उन्हें व्यवहार में उतारने के उद्देश्य से उनके प्रिय शिष्य विवेकानंद ने 1 मई 1897 ईस्वी में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

मिशन का उद्देश्य समाज की सेवा करना है इसका आदर्श वाक्य यह है “ईश्वर की आराधना का सर्वोत्तम मार्ग है मानव जाति की सेवा करना”। रामकृष्ण मिशन आपने सार्वजनिक कार्यों के लिए सुप्रसिद्ध हो गया।

मिशन में बाढ़ आ काल तथा महामारी के समय राहत कार्य किया। विवेकानंद (1863 – 1902 ईस्वी ) ने भारतीयों और पाश्चात्य दर्शन का गहन अध्ययन किया था स्वामी विवेकानंद ने प्रबुद्ध भारत ( अंग्रेजी ) व उद्बोधन ( बंगाली ) नामक पत्रिका का प्रकाशन किया।

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Vivekananda swami का बुक  राजयोग, कर्मयोग एवं वेदांत दर्शन उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं। मातृभूमि की दुर्दशा से हुए अत्यंत दुखी थे। संपूर्ण देश की यात्रा करने पर उन्हें चारों ओर गरीबी, गंदगी, बौद्धिक जड़ता और भविष्य के प्रति निराशा देखने को मिली।

Swami vivekananda speach in hindi

स्वामी विवेकानंद ने स्पष्ट कहा था की ‘ अपनी इस दरिद्रता और अवनति के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं’। उन्होंने नई समाज व्यवस्था लाने के लिए गरीबी दूर करने और जनता को जागृत करने के लिए भारत वासियों से आजीवन प्रयास करने को कहा।

नरेंद्रनाथ दत्त का नाम कैसे बदला और बना swami vivekananda

” नरेंद्रनाथ दत्त का नाम बदलकर महाराजा खेतड़ी के सुझाव पर स्वामी विवेकानंद” रख दिया गया था। विवेकानंद ने 1893 ई. में अमेरिका के शिकागो नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया।

उस सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण ने दूसरे देशों के लोगों को बड़ा प्रभावित किया। सुभाष चंद्र बोस ने स्वामी विवेकानंद को ‘आधुनिक राष्ट्रीय आंदोलन का आध्यात्मिक पिता’ कहा था।

1897 ईस्वी में दोबारा अमेरिका गये और इन्होंने न्यूयॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना की। 1897 में विवेकानंद ने कोलकाता से दो समाचार पत्रों का हिंदी में प्रकाशन किया।

विवेकानंद ने दो समाचार पत्रों 1. उद्बोधन 2. प्रबुद्ध भारती का हिंदी में प्रकाशन किया

स्वामी विवेकानंद हिंदू, धार्मिक सामाजिक आंदोलन का संस्था, संस्थापक, स्थापना, स्थल और उनके प्रमुख उद्देश्य के बारे में जानते हैं।

1. आत्मीय सभा ( संस्था ) इनके संस्थापक राम मोहन राय इसकी स्थापना वर्ष 1815 और इनका प्रमुख उद्देश्य था हिंदू धर्म की बुराइयों पर आक्रमण वह एकेश्वरवाद का प्रचार प्रसार।

2. ब्रह्म समाज (संस्था) का नाम है और इन के संस्थापक राम मोहन राय हैं, जिसे 1828 ईस्वी में कोलकाता में हुआ जिसका प्रमुख उद्देश्य है एकेश्वरवाद का प्रसार था पहले इसका नाम ब्रह्म सभा था।

3. धर्म सभा संस्था और इसके संस्थापक राधाकांत देव थे जिसका स्थापना 1829 ईस्वी में किया गया। कोलकाता इसका स्थल था और इसकी स्थापना का प्रमुख उद्देश्य ब्रह्म समाज के विरोध में हुई तथा इसका उद्देश्य हिंदू धर्म की रक्षा करना था।

4. संस्था रामकृष्ण मिशन का संस्थापक थे स्वामी विवेकानंद जिसकी स्थापना 1897 ईस्वी में बेलूर स्थल में हुआ इसका मुख्य उद्देश्य मानवतावादी एवं सामाजिक कार्य करना था।


Swami vivekananda biography in hindi

Swami vivekananda vivekananda jyanti and Speach
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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेंद्र को भी अंगरेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढंग पर ही चलाना चाहते थे।

नरेंद्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु वे पहले ब्रह्म समाज में गए किंतु वहां उनके चित्त को संतोष नहीं हुआ।

सन्‌ 1884 में विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई। घर का भार नरेंद्र पर पड़ा। घर की दशा बहुत खराब थी। कुशल यही थी कि नरेंद्र का विवाह नहीं हुआ था।

अत्यंत गरीबी में भी नरेंद्र बड़े अतिथि-सेवी थे। स्वयं भूखे रहकर अतिथि को भोजन कराते, स्वयं बाहर वर्षा में रातभर भीगते-ठिठुरते पड़े रहते और अतिथि को अपने बिस्तर पर सुला देते।

रामकृष्ण परमहंस की प्रशंसा सुनकर नरेंद्र उनके पास पहले तो तर्क करने के विचार से ही गए थे किंतु परमहंस जी ने देखते ही पहचान लिया कि ये तो वही शिष्य है जिसका उन्हें कई दिनों से इंतजार है।

परमहंस जी की कृपा से इनको आत्म-साक्षात्कार हुआ फलस्वरूप नरेंद्र परमहंस जी के शिष्यों में प्रमुख हो गए। संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद हुआ। स्वामी विवेकानन्द अपना जीवन अपने गुरुदेव स्वामी रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर चुके थे।

गुरुदेव के शरीर-त्याग के दिनों में अपने घर और कुटुंब की नाजुक हालत की परवाह किए बिना, स्वयं के भोजन की परवाह किए बिना गुरु सेवा में सतत हाजिर रहे। गुरुदेव का शरीर अत्यंत रुग्ण हो गया था।

कैंसर के कारण गले में से थूंक, रक्त, कफ आदि निकलता था। इन सबकी सफाई वे खूब ध्यान से करते थे। एक बार किसी ने गुरुदेव की सेवा में घृणा और लापरवाही दिखाई तथा घृणा से नाक भौंहें सिकोड़ीं।

यह देखकर विवेकानंद को गुस्सा आ गया। उस गुरुभाई को पाठ पढ़ाते हुए और गुरुदेव की प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम दर्शाते हुए उनके बिस्तर के पास रक्त, कफ आदि से भरी थूकदानी उठाकर पूरी पी गए।

गुरु के प्रति ऐसी अनन्य भक्ति और निष्ठा के प्रताप से ही वे अपने गुरु के शरीर और उनके दिव्यतम आदर्शों की उत्तम सेवा कर सके। गुरुदेव को वे समझ सके, स्वयं के अस्तित्व को गुरुदेव के स्वरूप में विलीन कर सके।

समग्र विश्व में भारत के अमूल्य आध्यात्मिक खजाने की महक फैला सके। उनके इस महान व्यक्तित्व की नींव में थी ऐसी गुरुभक्ति, गुरुसेवा और गुरु के प्रति अनन्य निष्ठा।

25 वर्ष की अवस्था में नरेंद्र दत्त ने गेरुआ वस्त्र पहन लिए। तत्पश्चात उन्होंने पैदल ही पूरे भारतवर्ष की यात्रा की। सन्‌ 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म परिषद् हो रही थी। स्वामी विवेकानंदजी उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप से पहुंचे।

योरप-अमेरिका के लोग उस समय पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे। वहां लोगों ने बहुत प्रयत्न किया कि स्वामी विवेकानंद को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले।

एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला किंतु उनके विचार सुनकर सभी विद्वान चकित हो गए। फिर तो अमेरिका में उनका बहुत स्वागत हुआ। वहां इनके भक्तों का एक बड़ा समुदाय हो गया।

तीन वर्ष तक वे अमेरिका रहे और वहां के लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान करते रहे। ‘अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा’ यह स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था।

अमेरिका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएं स्थापित कीं। अनेक अमेरिकन विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। वे सदा अपने को गरीबों का सेवक कहते थे। भारत के गौरव को देश-देशांतरों में उज्ज्वल करने का उन्होंने सदा प्रयत्न किया। 4 जुलाई सन्‌ 1902 को उन्होंने देह त्याग किया।

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Number 1. “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये “।

English में “Arise, awake and do not stop until the goal is reached”.

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Number 2. “खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप हैं “।

English में “The greatest sin is to think yourself weak”.

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Number 3. “तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता ” कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना हैं। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही हैं।

English में “You have to grow from the inside out”. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.

swami vivekananda scholarship for girls

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सोशल साइंस में रिसर्च करने वाली सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप ( swami vivekananda scholarship ) देने की घोषणा की है।

इसके तहत कैंडिडेट को पहले दो साल के लिए हर महीने 8 हजार रुपये और तीसरे व चौथे साल में हर महीने 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य वुमन एजुकेशन को बढ़ावा देना है।

एलिजिबिलिटी : इसके लिए ऐसी girls candidates apply कर सकती हैं, जो अपने मां-बाप की इकलौती संतान हों। उन्हेें किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट से सोशल साइंसेज में फुल टाइम पीएचडी में एडमिशन ऑफर मिला हो।

General category के candidates के लिए 40 वर्ष और आरक्षित वर्ग के candidates के लिए 45 वर्ष की उम्र सीमा भी है। ब्रिटेन की कीले यूनिवर्सिटी ने भारत सहित कई अन्य देशों के स्टूडेंट के लिए पोस्ट ग्रेजुएट स्कॉलरशिप ऑफर की है।

इस स्कॉलरशिप के लिए first क्लास डिग्री वाले कैंडिडेट ही अप्लाई कर सकते हैं। कीले यूनिवर्सिटी की इंटरनेशनल स्टूडेंट स्कॉलरशिप के तहत पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट को मास्टर डिग्री कोर्स में स्टडी के लिए ट्यूशन फीस में सालाना 3,000 पौंड तक की माफी swami vivekananda scholarship दी जाती है।

swami vivekananda scholarship से जुरी कुछ स्कालरशिप के बारे में नीचे लिंक द्वारा बताया गया है, जिससे आपको इसका अधिक लाभ मिल सके।

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