Rajiv dixit की रहस्यमय मौत हो जाने से सभी हैरान और परेशान हैं, रामदेव के साथ काम करने वाले राजीव दीक्षित के मौत को लोग रहस्यमय मानते हैं। ऐसा क्यों? Dr. Rajiv dixit के साथ मौजूद लोगों और डॉक्टर्स का दावा है कि वो लगातार एलोपैथी इलाज के लिए मना कर रहे थे.

Rajiv Dixit रहस्यमय मौत के पीछे का खुलासा राजीव दीक्षित दावे
Rajiv Dixit रहस्यमय मौत के पीछे का खुलासा राजीव दीक्षित दावे

Rajeev dixit के साथ के लोगों ने बाबा रामदेव पर सनसनीख़ेज आरोप लगाए गए, जिससे रामदेव साफ इनकार करते हैं. रामदेव के मुताबिक उस दिन उनकी राजीव से बात भी हुई थी.

और उन्होंने rajiv bhai से कहा था कि परेशानी ज्यादा है, ऐसे में उन्हें एलोपैथी इलाज ले लेना चाहिए, लेकिन rajeev dixit नहीं माने. कई दिनों की गहमा-गहमी के बाद आखिरकार मामला थम गया.

Who was rajiv dixit राजीव दीक्षित कौन थे

Rajiv dixit histroy के बारे में जानते हैं, यूपी के अलीगढ़ में राधेश्याम दीक्षित और मिथिलेश कुमारी के घर एक बच्चा 30 नवंबर, 1967 पैदा हुआ.जिसे उन्होंने राजीव नाम दिया. शुरुआती पढ़ाई वैसे ही हुई, जैसे यूपी के किसी मिडिल क्लास फैमिली के बच्चों की होती है. 

लेकिन इलाहाबाद में Btech करने के दौरान राजीव को उनका मकसद मिला. यहां अपने टीचर्स और कुछ साथियों के साथ राजीव ने ‘आजादी बचाओ आंदोलन’ शुरू किया. 

राजीव कि जिद थी भारत का सब कुछ स्वदेशी बनाना. IIT से Mtech करने के बाद राजीव ने कुछ वक्त तक CSIR में काम किया. बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने डॉ. कलाम के साथ भी काम किया.

यहां से निकलने के बाद राजीव की जिंदगी का एक ही मकसद था. राष्ट्रसेवा. इसके मायने, पैमाने और तरीके उनके खुद के ईजाद किए हुए थे और वो यही करते रहे. राजीव का मानना था कि भारत का पूरा मौजूदा सिस्टम पश्चिमी देशों का पिछलग्गू है, जिसे बदलने की जरूरत है.

तत्पश्चात् वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ॰ ए पी जे अब्दुल कलाम के साथ जुड़ गये। इसी बीच उनकी प्रतिभा के कारण सीएसाअईआर में कुछ परियोजनाओ पर काम करने और विदेशो में शोध पत्र पढने का मौका भी मिला.

वे भगतसिंह, उधमसिंह, और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों से प्रभावित रहे। बाद में जब उन्होंने गांधीजी को पढ़ा तो उनसे भी प्रभावित हुए।

राजीव दीक्षित ने 20 वर्षों में लगभग 12000 से अधिक व्याख्यान दिये।भारत में 5000 से अधिक विदेशी कम्पनियों के खिलाफ उन्होंने स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत की, उन्होंने 9 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का दायित्व सँभाला।

डॉ राजीव दीक्षित से जुड़ी कर्वी कड़ी

Dr. दीक्षित ने स्वदेशी आन्दोलन तथा आज़ादी बचाओ आन्दोलन की शुरुआत की तथा इनके प्रवक्ता बने. उन्होंने जनवरी 2009 में भारत स्वाभिमान न्यास की स्थापना की तथा इसके राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सचिव बने।

गाय के गोबर से ईंधन बनाने और गोरक्षा की बात करने वाले राजीव के राष्ट्रवाद की अवधारणा काफी हद तक RSS के राष्ट्रवाद की अवधारणा से मिलती-जुलती है. Rajiv Dixit एमटेक करने के बाद से इन्होंने पूरे देश में घूम-घूमकर स्वदेशी का प्रचार किया. खुद को गांधीवादी कहने वाले राजीव ने 13 हजार से ज्यादा व्याख्यान किए, 

जिसके बाद इनके छह लाख से ज्यादा समर्थक होने का दावा किया जाता है. अपने व्याख्यानों में ये भारत के शानदार इतिहास का जिक्र करते हुए सब कुछ स्वदेशी रखने का आग्रह करते थे और राजीव दीक्षित के नुस्खे अपनी बात के पक्ष में कई विचित्र दावे पेश करते थे. हालांकि, इनके कई दावे गलत भी साबित हुए.

राजीव दीक्षित से जुड़े कुछ दावे

Rajiv Dixit रहस्यमय मौत के पीछे का खुलासा राजीव दीक्षित दावे
Rajiv Dixit रहस्यमय मौत के पीछे का खुलासा राजीव दीक्षित दावे

भावना प्रधान दावे शादी करने वाले राजीव अपने बात को मनवाने के लिए पेश करते थे, राजीव के मुताबिक यूनीलीवर कंपनी का नाम बदलकर हिंदुस्तान लीवर इसलिए कर दिया गया.

ताकि भारतीयों को बेवकूफ बनाया जा सके. नए नाम की वजह से भारतीयों को लगेगा कि ये एक भारतीय कंपनी है और वो इसका सामान खरीदने में हिचकेंगे नहीं.

rajeev dixit in hindi दावों को पेश किया गया है।

ममता बनर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में राजीव दीक्षित के दावे. राजीव का दावा था कि ममता बनर्जी बीफ खाती हैं. बीफ खाने की वजह से ही ममता ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने देश में या पश्चिम बंगाल में बीफ बैन कराया, तो ममता वाजपेयी सरकार गिरवा देंगी.

Rajiv Dixit के दावे अमिताभ बच्चन के बारे में

अपने एक व्याख्यान में राजीव ने दावा किया कि अमिताभ बच्चन ने उनके साथ बातचीत में ये स्वीकार किया था कि उनकी आंत पेप्सी पीने की वजह से खराब हो गई थी, जिसका बाद में ऑपरेशन हुआ था. राजीव के मुताबिक अमिताभ ने ये भी कहा कि इसी वजह से उन्होंने पेप्सी पीना और इसका प्रचार करना बंद कर दिया.

हेमा मालिनी के बारे में राजीव दीक्षित के कुछ दावे

अपने एक व्याख्यान में राजीव dixit ने ये भी कहा कि धर्मेंद्र के बुलावे पर वो महाराष्ट्र में एक व्याख्यान करने गए थे, जहां उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी से पूछा कि क्या वो लक्स से नहाती हैं.

हेमा ने जवाब दिया कि वो लक्स से नहीं, बल्कि बेसन में मलाई डालकर नहाती हैं. राजीव ने उनसे पूछा कि वो ये बात पूरे देश को क्यों नहीं बतातीं तो हेमा ने कहा कि अगर बता दिया, तो सारी औरतें हेमा जितनी खूबसूरत हो जाएंगी.

राजीव दीक्षित के दावे

स्वदेशी प्रचार में लगे राजीव कहते थे कि गाय के गोबर से बने साबुन से नहाने के 10 मिनट बाद शरीर से खुशबू आने लगती है. पुराने समय में राजा यज्ञ से पहले गोबर से नहाते थे। राम को भी ऐसा ही करना पड़ा था. विदेशी कंपनियों के साबुन न खरीदने से देश का पैसा देश में ही रहेगा.

1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी पर राजीव का मानना था कि ये कोई हादसा नहीं, बल्कि अमेरिका द्वारा किया गया एक परीक्षण था, जिसमें भारत के गरीब लोगों को शिकार बनाया गया. राजीव लंबे समय तक इस हादसे की जिम्मेदार कंपनी यूनियन कार्बाइड के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे.

Rajiv Dixit का नेस्ले कंपनी के बारे में दावे पेश किए

राजीव का दावा था कि नेस्ले कंपनी के प्रोडक्ट मैगी में सुअर के मांस का रस मिलाया जाता है और उनकी चर्बी का इस्तेमाल होता है. कोका कोला में तेजाब होने की बात भी राजीव कहते थे.

अमेरिका में हुए 9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के दावे राजीव दीक्षित

अमेरिका में हुए 9/11 यानी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले को राजीव खुद अमेरिका द्वारा कराया गया हमला मानते थे. अमेरिका में लोन लैंटर्न सोसाइटी ने इस बात को उठाया था और राजीव इसका समर्थन करते थे.

Rajiv Dixit के दावे जम्मू कश्मीर को कैप्चर करना चाहता है

दीक्षित के मुताबिक अमेरिका जम्मू-कश्मीर को कैप्चर करना चाहता है और इसी वजह से वो पाकिस्तान को पैसा देता है, ताकि पाकिस्तान आतंकवाद को पाल सके और कश्मीर मसले पर भारत की नाक में दम कर सके.

यहां तक कि उनका दावा था,राजीव का एक व्याख्यान है, जिसमें वो कहते हैं कि, “जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और एडविना एक ही कॉलेज में पढ़े थे और एडविना से दोनों लगे हुए थे.

एडविना इतनी चालाक महिला थी कि दोनों को हैंडल करती थी. जिन्ना और नेहरू चरित्र के बेहद हल्के आदमी थे. एडविना के पास नेहरू की आपत्तिजनक तस्वीरें थीं, जिनके आधार पर नेहरू को ब्लैकमेल करके भारत का बंटवारा कराया गया.”

बाबा रामदेव और राजीव दीक्षित से जुड़ी रहस्यमई बातें

राजीव दीक्षित के बारे में मौजूद जानकारी के मुताबिक वो 2009 में बाबा रामदेव के संपर्क में आए और उन्होंने ही रामदेव को देश की समस्याओं और काले धन वगैरह के बारे में बताया, जिससे रामदेव बहुत प्रभावित हुए.

दोनों साथ में काम करने के लिए सहमत हो गए. इंटरनेट पर दोनों तरह की जानकारी मौजूद है. राजीव के समर्थक दावा करते हैं कि 2009 में भारत स्वाभिमान आंदोलन उन्होंने शुरू किया था, जबकि baba रामदेव के समर्थक इसे उनकी उपज मानते हैं. dr. राजीव इस ट्रस्ट में सचिव पद पर थे.

बाबा रामदेव और राजीव दीक्षित के बीच का आंदोलन

भारत स्वाभिमान आंदोलन शुरू करने के दौरान Rajiv dixit ji और baba Ramdev ने शपथ ली कि ‘हम केवल कुशल लोगों को मतदान करेंगे’, ‘हम दूसरों को 100 फीसदी मतदान के लिए प्रेरित करेंगे’, ‘हम भारत को विश्व-शक्ति बनाएंगे’, ‘हम भारत को पूरी तरह से स्वदेशी बनाएंगे’ और ‘बुद्धिमान, ईमानदार लोगों को जोड़कर देश के विकास में लगाएंगे.’

इस आंदोलन के तहत राजीव और रामदेव ने योजना बनाई कि लोगों को अपने साथ जोड़ने के बाद 2014 में वो देश के सामने अच्छे लोगों की एक नई पार्टी का विकल्प रखेंगे और लोकसभा चुनाव में दावेदारी पेश करेंगे.

आंदोलन की शुरुआत से पहले आस्था चैनल पर राजीव दीक्षित और रामदेव, दोनों के प्रोग्राम टेलीकास्ट किए जाते थे. दोनों ने कुछ वक्त तक साथ में काम किया. दोनों साथ ही आस्था और संस्कार जैसे जैसे चैनलों पर आते थे.

जिसके बाद दोनों में विवाद होने की बात कही जाती है. Rajiv Dixit के कुछ समर्थक दावा करते हैं कि रामदेव राजीव की लोकप्रियता से घबरा गए थे और फिर उन्होंने राजीव के खिलाफ षड़यंत्र किए.

राजीव दीक्षित के ट्रस्ट,वेबसाइट और किताबें

इंटरनेट पर राजीव दीक्षित के नाम से कई वेबसाइट्स मौजूद हैं, जिन्हें अलग-अलग लोग चलाते हैं. इन पर मौजूद फोन नंबरों पर बात करने पर पता चला कि ये सभी खुद को राजीव का समर्थक बताते हैं.

इन वेबसाइट्स पर राजीव दीक्षित के वीडियो और ऑडियो मौजूद हैं और ये उनकी किताबें भी बेचते हैं.

rajivdixitmp3.com नाम की वेबसाइट चलाने वाली दिनेश राठौर से बात करने पर पता चला कि उन्होंने राजीव के भाई प्रदीप के साथ 2010 से 2012 के दौरान काम किया और फिर दोनों अलग हो गए.

इस वेबसाइट से जरिए होने वाली बिक्री के बारे में दिनेश का कहना है कि बहुत ज्यादा बिक्री होती नहीं है. जो होती है, उससे बस उनका खर्च ही निकलता है. और कुछ नहीं.

rajivdixit.in नाम की वेबसाइट पर उनके भाई प्रदीप दीक्षित की डिटेल दी गई है, लेकिन जब इन्हें फोन किया गया, तो इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. दिनेश राठौर के मुताबिक राजीव के परिवार का कोई भी शख्स अब उनकी मौत या उनके बारे में बात नहीं करना चाहता.

rajivdixit.net नाम की वेबसाइट पर जाने पर आपको वर्धा के सेवाग्राम में जाने का निमंत्रण मिलेगा, जहां हर साल 30 नवंबर को राजीव की बरसी मनाई जाती है. वर्धा में आश्रम बनाने के लिए राजीव दीक्षित को 23 एकड़ की जमीन मुहैया कराई गई थी.

ये राजीव के ट्रस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट बताई जाती है, जिस पर दिल्ली में कराए जाने वाले चिकित्सा शिविर की भी जानकारी है. हालांकि वेबसाइट पर वेबसाइट चलाने वालों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

क्या है Swadeshi Rajiv dixit

राजीव दीक्षित अगर जिंदा रहता तो भारत में अब तक स्वदेशी और आयुर्वेद का सबसे बड़ा ब्रांड बाजार शायद बन गया होता.baba Ramdev से भी बड़ा होता कहा तो यहां तक जाता है, कि राजीव दीक्षित को बाबा रामदेव अपने प्रतिद्वंदी के तौर पर देखा करते थे ऐसे शख्स जिसके राष्ट्रवाद की कल्पना स्वदेशी और अखंड भारत के इर्द-गिर्द ही बुनी गई थी.

स्वदेशी राजीव दीक्षित भारत की पूरी व्यवस्था को बदल डालने की हिमायत रखता था, भारत देश के सबसे बड़े दुश्मन जवाहरलाल नेहरू को देखने वाला यह शख्स अभिनेत्री हेमा मालिनी, एक्टर अमिताभ बच्चन, अटल बिहारी वाजपेयी और बंगाल के सीएम ममता बनर्जी जैसी हस्तियों से रेगुलर बातचीत की बात स्वीकार नहीं की,

वह कहता था कि पिछले 20 साल में woh कभी बीमार नहीं पड़े थे जुकाम को अंगूठे पर मेथी का दाना बांधकर जुकाम को ठीक कर लेते थे. राजीव दीक्षित के लेख का बंदरबांट हो रहा है जिनका नाम था Rajiv Dixit.

How Rajiv dixit died

नवंबर के आखिरी सप्ताह में राजीव छत्तीसगढ़ दौरे पर थे, जहां उन्होंने अलग-अलग जगहों पर व्याख्यान देने थे. 26 से 29 नवंबर तक अलग-अलग जगह व्याख्यानों के बाद जब 30 को वो भिलाई पहुंचे.

तो वहां उनकी तबीयत खराब हो गई. वहां से दुर्ग जाने के दौरान कार में उनकी हालत बहुत खराब हो गई और उन्हें दुर्ग में रोका गया. दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें भिलाई के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और फिर वहां से अपोलो BSR हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें डेड डिक्लेयर कर दिया.

इस दौरान Rajiv Dixit के साथ मौजूद लोगों और डॉक्टर्स का दावा है कि वो लगातार एलोपैथी इलाज के लिए मना कर रहे थे. राजीव के साथ के लोगों ने बाबा रामदेव पर सनसनीख़ेज आरोप लगाए गए.

जिससे रामदेव साफ इनकार करते हैं. रामदेव के मुताबिक उस दिन उनकी राजीव से बात भी हुई थी और उन्होंने राजीव से कहा था कि परेशानी ज्यादा है, ऐसे में उन्हें एलोपैथी इलाज ले लेना चाहिए, लेकिन राजीव नहीं माने. कई दिनों की गहमा-गहमी के बाद आखिरकार मामला थम गया.

Rajiv dixit 29 नवंबर 2010 को भिलाई में एक भी BSR Apollo Hospital में निधन हो जाने के बाद पुलिस ने rajeev dixit के death body को बिना पोस्टमार्टम किए ही उनका अंतिम संस्कार के लिए राजीव दीक्षित के गृह नगर भेज दिया गया

Who killed rajiv dixit

Rajeev dikshit की पत्नी और परिवार वालों ने भी उनकी मृत्यु के कारणों पर संदेह व्यक्त करते रहे उन्होंने संदेह किया की How did rajiv dixit died ऐसे कैसे राजीव दीक्षित death कर सकते हैं, राजीव दीक्षित के परिवार वालों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime minister office) से भी संपर्क साधा.

Rajiv dixit से जुड़ी ताजा खबर

स्वदेशी राजीव दीक्षित से जुड़ी ताजा खबर यह है कि प्राइम मिनिस्टर ऑफिस राजीव दीक्षित से जुड़े जवाब में जल्द ही जांच के लिए दुर्ग पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजने वाला है.

30 नवंबर, 2010 को Rajiv Dixit की मौत हुई, जो विवादास्पद है.

हालांकि, Rajiv Dixit के समर्थकों का दावा है कि मौत के बाद Rajiv Dixit की बॉडी नीली पड़ गई थी. ऐसा लग रहा था, जैसे उन्हें जहर दिया गया हो. उनके समर्थकों ने पोस्टमॉर्टम कराए जाने की भी जिद की, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई. साथ ही, राजीव की बॉडी को वर्धा लाने के बजाय हरिद्वार में रामदेव के पतंजलि आश्रम ले जाया गया और वहीं उनकी अंत्येष्टि कर दी गई. जय हिन्द – Nolshi News

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