निभर्या के दोषियों को  3 मार्च को भी नही होगी फांसी  


राष्ट्रपति के पास फासी न होने के लिए दया याचिका भेजे जा सकते हैं। चारो दोषियों में से एक के खिलाफ एक मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट में भी अभी तक चलता आ रहा है, जब तक इस मुकदमें पर फैसला नहीं आ जाता तब तक फांसी नहीं दीया जा सकता। पिछले 7 साल से लड़ रहे निर्भया के दोषियों के बचाव के लिए वकील एपी सिंह ने कहा है। उन्होंने यह बोला है कि मेरे से  लिखकर रख लो, 3 मार्च २०२० को फांसी बिल्‍कुल नहीं हो पायेगी।

निभर्या के दोषियों को  3 मार्च को भी नही होगी फांसी - AP SINGH



एपी सिंह वकील ने बतायाकि मैं क्लाइंट से भी मिलूंगा। उनके कानूनी विकल्प जो बचे है उस बातचीत करूंगा फिर वे भी वह लोग चाहेंगे या उनका परिवार जो चाहेंगे, वो में करूंगा। अभी कई और कानूनी विकल्प भी बचे हैं। इन विकल्‍पो का उपयोग भी किया जाना है। भारत के राष्ट्रपति के पास दोबारा से इन दोषियों की दया याचिका भी भेजी जाएगी और अगर खारिज होती है तो फिर और जो भी विकल्प बचे होंगे इसका भी उपयोग करेंगें।

उनसे जब पुछा गया कि क्या आगे भी आप एक-एक कर के इन कानूनी विकल्पों का  उपयोग करेंगें, क्या इन चारों लोगो की याचिकाएं एक साथ आप नहीं भेजेंगें? इस पर उन्‍होने जवाब दिया कि – दया याचिका जब किसी की भेजी जाती है तो सभी क्लाइंट का आधार एक नहीं होता है आधार अलग-अलग होते है। इसलिए दोषियों कि एक-एक कर के ही ये याचिकाएं लगानी होती है।

एपी सिंह के बयान से ऐसा लगता है कि 2 से 3 महीने तक भी इन दोषियों की फांसी को बड़ी आसानी से टाल सकते है। जब एपी सिंह से पुछा गया कि क्‍या सभी प्रकार की कानूनी विकल्प उपयोग कर अधिक से अधिक कितने समय तक के लिए इस फांसी को टाला जा सकता है? इस पर एक बात कोट कर एपी सिंह ने लिखने के लिए कहा, ”न मैं कोई परमात्मा हूं।

और ना हीं मैं यमराज हूं। मैं तो सर्फि एक वकील हूं। जो भी हमारे क्लाइंट कहेगें और उनका जो परिवार के लोग कहेंगे, उनको भारतीय संविधान के अनुसार, हम सुप्रीम कोर्ट एवं लैंडमार्क के जजमेंट के अनुसार सभी को हम कानूनी विकल्प भी उपलब्ध कराते ही रहेंगें। बेशक इन दोषीयों के केस में मीडिया का ट्रायल कुछ ज्‍यादा हुआ है। पब्लिक का और पॉलिटिकल प्रेशर भी कोर्ट और सरकार पर है लेकिन इससे मैं न्याय की तराजु  को झुकने बिल्‍कुल नहीं दूंगा।

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