डिप्रेशन दूर
कैसे करें अपना डिप्रेशन दूर

डिप्रेशन एक बड़ी समस्या है जाे कि आत्‍महत्‍या तक करने पे मजबुर कर देती है। लेकिन परिवार और मित्रों के दया, प्रेम, भावपूर्ण समर्थन और कुछ घरेलू उपचारों के साथ डिप्रेशन जैसी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आप अपनी स्थिति को अच्छी तरह से मैनेज करके और बिना किसी दवा के डिप्रेशन से छुटकारा पा सकते हैं। बस अपने आप पर विश्वास रखें और अपने मनोबल को टूटने ना दें। अपनी आशा को जीवित रखें और सदा खुश रहने की कोशिश करें।

आज हम आपको कुछ ऐसे आयुर्वेदिक घरेलू उपायों की जानकारी दे रहे हैं जो सस्ते और दुष्प्रभाव से मुक्त हैं और डिप्रेशन जैसी समस्या से आपको मुक्ति दिलाएंगे।


  • डिप्रेशन में अपने आप पर विश्वास रखें और अपने मनोबल को टूटने ना दें। 
  • अपनी आशा को जीवित रखें और सदा खुश रहने की कोशिश करें।
  • इलायची का तेल डिप्रेशन को दूर करने में मदद करता है। नहाने के पानी में इलायची के तेल को रख कर स्नान करें। 
  • लाल गुलाब के जरिये अवसाद पर काबू पाने में आपकी काफी मदद करेगा।
  • हल्दी का भोजन में उपयोग करें।   
  • काजू का सेवन घबराहट और तनाव कम करने में और डिप्रेशन से छुटकारा दिलाने में काम करता है। 
  • डिप्रेशन में तेल की मालिश मन को शांत करती है। 
  • शतावरी का इस्‍तेमाल मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। 
  • मन को शांत रखनें के लिए जटामांसी पाउडर का इस्‍तेमाल 100-250 मिलीग्राम प्रतिदिन एक बार नियमित रूप से 2 महीने के लिए लें।
  • अश्वगंधा अवसाद के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक उपाय।  
  • डिप्रेशन से छुटकारा पाने के लिए आप नींबू बाम की चाय का सेवन करें। 
  • मूड को खुश रखने में प्रतिदिन 2 ग्राम कद्दू के बीज का सेवन करें। 

इलायची का तेल

यह एक प्राकृतिक एंटीडिप्रेसेंट (anti-depressant) है। इसकी चाय मन को प्रभावित करती है और मूड को खुश करने में मदद करती है। लगभग 1.5 ग्राम इलायची पाउडर और पानी का काढ़ा बना लें और प्रतिदिन एक गिलास का सेवन करें।


आप स्वाद के लिए चीनी का भी उपयोग कर सकते हैं। नहाने के पानी में इलायची के तेल को रख कर स्नान करें। यह तनाव को कम करने और निराशा से लड़ने में मदद करता है।


लाल गुलाब के जरिये कैसे डिप्रेशन से निकलें  

लाल गुलाब से डिप्रेशन पर काबू पाने में आपकी काफी मदद करेगा। इसके लिए 250 मिलीलीटर पानी में 25-30 गुलाब की पंखुड़ियों को डाल कर उबाल लें। आप चाहें तो स्वाद के लिए मिश्री का उपयोग भी कर सकते हैं। प्रतिदिन दो बार इस काढ़े को पिएं। इससे आपकी नसों में शांति बनी रहती है।

हल्दी डिप्रेशन का रामवाण जानिए कैसे

आयुर्वेद में मौसम के कारण प्रभावित विकारों के इलाज में हल्दी का उपयोग करने के लिए कहा गया है। यानी मौसम परिवर्तन के कारण अवसाद की समस्या में मसाले के रूप में अपने भोजन में 2-3 ग्राम हल्दी का सेवन करें या फिर पानी या दूध के साथ भी इसका सेवन कर सकते हैं।

काजु का सेवन डिप्रेशन को दूर करता है

काजू प्राकृतिक एंटीडिप्रेसेंट हैं। काजू का सेवन घबराहट और तनाव कम करने में मदद करता है। डिप्रेशन से छुटकारा दिलाने में काजू दवा के बराबर काम करता है। काजू पोषक तत्वों और vitamin-c से समृद्ध स्रोत है जो तंत्रिकाओं को आराम देने और मूड को अच्छा करने में मदद करता है।

ब्राह्मी तेल से दूर होता डिप्रेशन

ब्राह्मी तेल फिर से जवान कर देने वाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। इसके तेल की मालिश मन को शांत करती है। यह अवसाद के इलाज में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है।

डिप्रेशन कम करें शतावरी से

शतावरी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। इसमें folic acid और Tryptophan है। ये घटक मूड बढ़ाने वाले रसायनों का उत्पादन करते हैं। डिप्रेशन जैसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए गर्म milk या शहद के साथ ASPARAGUS  पाउडर का सेवन करें या फिर सब्जी के रूप में अपने आहार में शतावरी का उपयोग करें।

जटामांसी से डिप्रेशन करे दूर जानें कैसे

जटामांसी मुख्य रूप से न्यूरो मानसिक रोगों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह मन को शांत करने और मानसिक समस्याओं को रोकने में लाभदायक है। यह जटामांसी की जड़ का उपयोग मूड को स्थिर करता है।


मन को शांत रखता है और अच्छी नींद को प्राप्त करने में मदद करता है। जटामांसी पाउडर का 100-250 मिलीग्राम प्रतिदिन एक बार नियमित रूप से 2 महीने के लिए लें। निश्चित रूप से सिर्फ 15 दिनों में आपको सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

गिलोय का उपयोग कर डिप्रेशन से बचें

गुदुची (गिलोय) फिर से युवा करने के गुणों के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग चिंता, अवसाद, सर में दर्द और मनोदशा विकारों के इलाज में व्यापक रूप से किया जाता है।


यह मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा करता है और tension से राहत देता है। 500 मिली ग्राम गुदुची पाउडर को Golden liquid-honey के साथ मिलाकर प्रतिदिन दो बार इसका सेवन करने से लाभ मिल सकता है।

डिप्रेशन में कद्दू के बीज का सेवन है लाभदायक

कद्दू के बीज प्राकृतिक रूप से अवसाद को ख़त्म करने में लाभदायक हैं। कद्दू के बीज में एल-ट्रिप्टोफेन होता है जो सिरोटोटिन (मूड स्टेबलाइज करने वाला हार्मोन) हार्मोन के उत्पादन में मदद करता है।


कद्दू का बीज स्वस्थ वसा और मैग्नीशियम से भरा हुआ है जो मूड को खुश रखने में मदद करता है। इसके लिए आप प्रतिदिन 2 ग्राम कद्दू के बीज का सेवन करें। 

कैमोमाइल चाय से करें डिप्रेशन का उपचार

वैज्ञानिक तौर पर साबित हुआ है कि कैमोमाइल एक प्राकृतिक एंटीडिप्रेसेंट जड़ी बूटी है। इसका उपयोग मन को शांत करता है और डिप्रेशन से बाहर निकलता है। इसका उपयोग बहुत ही सुरक्षित है।


कैमोमाइल बच्चों द्वारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दवा के उपचार के विपरीत इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। यह चिंता को दूर करने में भी बहुत प्रभावी है और डिप्रेशन के समय नींद नहीं आने की समस्या में भी बहुत लाभदायक है। रात के खाने के बाद एक कप कैमोमाइल चाय पीने से अच्छी नींद आती है और पाचन भी बेहतर होता है।

अवसाद को ख़त्म करें केसर से

केसर अवसाद जैसी समस्या के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह एक शक्तिशाली और सुरक्षित जड़ी बूटी है जो आपके मूड को बहुत प्रभावी ढंग से खुश रखता है।


अध्ययन ने यह साबित किया है कि हल्के और मध्यम अवसाद से पीड़ित कई लोगों ने अपने दैनिक आहार में केवल 30 ग्राम केसर का उपयोग करके अपने मूड में भारी बदलाव का अनुभव किया है। केसर व्यक्ति को आराम देने और मूड को सूधारने में मदद करता है।

अश्वगंधा अवसाद के लिए बेहतर उपचार

अश्वगंधा अवसाद के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक उपाय है, प्रतिदिन शहद के साथ एक चम्मच अश्वगंधा का सेवन करें, यह अवसाद जैसी समस्या को दूर करेगा।

नींबू बाम दिलाएगा छुटकारा अवसाद से

नींबू बाम केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के कामकाज को नियमित करके तनाव, चिंता को कम करने और शांतिपूर्ण नींद को प्राप्त करने में मदद करता है। अवसाद से छुटकारा पाने के लिए आप नींबू बाम की चाय का सेवन करें या फिर आप अरोमा थेरेपी के लिए इसके तेल का उपयोग कर सकते हैं।

इसका आकर्षक सुगंध उदास मन को ठीक करती है और मन को सुखदायक प्रभाव देती है। गर्भवती महिलाओं या स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए इसका उपयोग अच्छा नहीं होता है।

बादाम के उपयोग से जाने कैसे खत्म करें अवसाद

बादाम में protein, vitamin E, मैग्नीशियम, fiber और कई आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं। गर्म दूध में एक चम्मच almond का पेस्ट रोजाना मिलाकर पीने से अवसाद जैसी समस्या में काफी तेजी से आराम मिलता है।


Dispersion का शिकार हो रहे लोग लॉकडाउन में

कोरोना महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के दौरान घर में रह रहे लोगों पर सकारात्मक और नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग मेंटली डाउन हो चुके हैं।

वहीं कुछ की स्थिति में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।बिहार में भी लोगों के दिमाग पर लॉकडाउन का खासा असर हुआ है। शहर में साइकेट्रिस्ट ने अलग-अलग के लोगों के हाव-भाव पर यह निष्कर्ष निकाला है।

लॉकडाउन का लोगों के दिमाग पर अवसाद का असर

शहरों में लोग डिप्रेशन की शिकायत डॉक्टरों से कर रहे हैं। दरअसल, राजधानी में 20 से ज्यादा प्रमुख साइकेट्रिस्ट हैं, जिनके पास औसतन हर रोज 8 से 10 लोगों के फोन कॉल आते हैं और इतने ही क्लीनिक पर अपनी तकलीफ लेकर आ रहे हैं।

इनमें से ज्यादातर को कोरोना की एंजाइटी की शिकायतें हैं, जबकि कुछ को अपनी नौकरी, धंधे और काम ठप होने पर आर्थिक स्थिति की चिंता सता रही है।

साइकेट्रिस्ट चिकित्सक का कहना है कि लोग डिप्रेशन की शिकायत लेकर आ रहे हैं, लोगों को काम-धंधे की चिंता ज्यादा सता रही है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद डिप्रेशन के मामले और बढ़ सकते हैं।

डॉक्टरों ने बताया कि लोग लॉकडाउन में गैजेट्स का भी ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन ये आदत उन्हें डिप्रेशन में ले जाएगी। क्योंकि गैजेट्स, टीवी या फिर कोरोना की लगातार न्यूज़ देखने की वजह से लोग एंजाइटी का शिकार होते हैं, ऐसे में उन्हें और उनके बच्चों को गैजेट्स से दूर रहना चाहिए।

लॉकडाउन में क्यों बढ़ेगी मानसिक बीमारिया

केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी इस सवाल पर कहते हैं कि महामारी की स्थिति में लोगों को अनिश्चितता महसूस होती रहती है।

अकेलापन इन बातों को और बढ़ा देता है। यही विचार और भावनाएं एंग्जायटी डिसऑर्डर में बदलने लगती हैं। जिन देशों में सॉर्स की बीमारी आई थी।

वहां के सर्वे बताते हैं कि सात फीसदी में एंग्जायटी और 17 फीसदी में गुस्से के लक्षण देखे गए।  कोरोना वायरस के बजह से लॉकडाउन को दिन ब दिन बढ़ाते रहने के कारण भी हो सकता है, की डिप्रेशन के शिकार हुए मरीज़ो की संख्या में बढ़ोतरी हो।

अवसाद क्यों किसी को भी सकता है

ये किसी को भी हो सकता है,वैसे शोध से पता चलता है कि इसके पीछे कोई आनुवांशिक वजह भी हो सकती है. इसके तहत कुछ लोग जब चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे होते हैं, तो उनके अवसाद में जाने की आशंका अधिक रहती है। जिन लोगों के परिवार में अवसाद का इतिहास रहा हो वहाँ लोगों के डिप्रेस्ड होने की आशंका भी ज़्यादा होती है।

इसके अलावा गुणसूत्र 3 में होने वाले कुछ आनुवांशिकीय बदलावों से भी अवसाद हो सकता है। इससे लगभग चार प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं।

डिप्रेशन के कारण आपको आर्थराइटिस, अस्थमा, हार्ड डिजीज, कैंसर, डायबिटीज और मोटापा जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। आपको यह बता दें दुख और दुखदायक घटना हर किसी के जीवन में होती है, वहीं लगातार दुखी और निराश महसूस करना सामान्य नहीं है।

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