पटना बिहार . जदयू से 29 जनवरी को निकाले गये प्रशांत किशोर ने आज पहली बार पटना पहुंच कर इस रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी चुनावी इरादे को सबसे सामने  जाहिर किया है। किशोर ने कहा- कि बिते पिछले 1.5 सालों से मैं हरेक प्लेटफॉर्म पर कहता आया हुँ कि मैं सभी यंग लोगों को इस राजनिती से जोड़ना चाहता हूं जो कि बिहार को आगे की और ले जाएं। 

आज पहली बार प्रशांत किशोर बिहार आकर अपनी चुनावी इरादे जाहिर किया



मैं इस 20 तारीख से मैं एक और नये कार्यक्रम को शुरू करने वाला हूं- जिसका नाम है बात बिहार की। इस क्रार्यक्रम के तहत बिहार के करीब 8 हजार से भी अधिक गांवों से लोगों को चुना जाना है जिनकी सोच ऐसी हों कि हमारे बिहार को अगले 10 साल में 10 अग्रणी राज्यों में बिहार को शामिल करा सकते हो।

पीके कहे जाने वाले प्रशांत किशोर ने बोला कि बिहार के नीतीश  सरकार ने उन्हें अपने बेटे की तरह रखा था और वे आज भी नितिश कुमार को पिता तुल्य हीं मानते हैं। नितिश के प्रशांत किशोर को पार्टी से निकालने समेत नीतीश के हर सारे फैसले उन्हें मंजूर किया हैं। प्रशांत ने कहा है कि नीतीश कुमार के साथ उनके मतभेद सिर्फ विचारधारा के कारण हैं।

नीतीश को है पिके से मतभेद के दो कारण –


पहला कारण : प्रशांत का मानना है कि नीतीश कुमार जी कहते है कि वे गांधी, जेपी एवं लोहिया की बातें का अनुसरण नहीं छोड़ सकते है। पर मेरा मानना है कि ऐसे मे वे गोडसे जैसी विचारधारा रखने वालों के साथ कैसे खड़े हो सकते हैं। मेरा यह मतलग कतई नहीं है कि भाजपा के साथ खड़े ना हो, लेकिन वह पाटी जो गांधी और गोडसे की सोच रखती हो ऐसे विचारधारा के साथ प्रशांत किशोर नहीं चल सकते।

दूसरा कारण: बिहार के चुनाव में जदयू की पोजिशनिंग को लेकर भी पिछे काफी मतभेद हुो चुके है। हम यह भी जानते है कि भाजपा और जदयू पिछले 15 साल से संबंध रहा है। पर अब हम ऐसा नेता नही चाहते है जो किसी का पिछलग्गू हो हम ऐसा नेता चाहते है जो कि अपना स्वतंत्र विचार रख सके। कुछ बिहार के लोग कहते हैं कि बिहार विकास के लिए अगर कुछ मूल बातों पर समझौता भी करना पड़ता है, तो इसमे हर्ज हीं क्‍या है।

लेकिन हम उन सभी लोगो केा कहना चाहते है कि आप लोगो को यह भी जरूर देखना चाहिए कि क्या बाकई में इस जदयू और भाजपा की गठबंधन से आपक बिहार का विकास भी हो रहा है क्या।

पीके ने कहा कि बिहार का नेता को पिछलग्गू नहीं होना चाहिए


पीके ने बोला कि नीतीश कुमार जी की जदयू पार्टी का कहना है कि इस बिहार मे पहले कुछ भी नही हुआ करता था, इसलिए हमारी पार्टी ने जितना भी किया है वह सही है। उनकी पार्टी के अनुसार लालू जी के समय से तुलना करना तो ठीक-ठाक है, लेकिन बिहार के लोगो को यह भी देखना होगा कि बिहार दूसरे राज्यों के मुकाबले में किस स्‍थान पर  खड़ा हैं, यह भी बाते लोगो केा देखनी चाहिए। 

में जदयु या बिहार के लोगो से यह पुछना चाहता हुँ कि सूरत से कोई भी व्यक्ति अपने बिहार काम करने के लिए आता है। ऐसा तभी संभव होगा जब शीर्ष नेतृत्व के नता किसी का पिछलग्गू न हुआ करता हों। यह तब होगा जब गांव और पंचायत के स्तर से आम लोग आएं और 10 साल के बाद बिहार को सबसे आगे देखना चाहेतें हों। जैसे मुंबई पुरी रात खुला रही है तो पटना पुरी रात खुला क्यों नहीं रह सकता?

बिहार के नोजवानो को साधने की है तैयारी


प्रशांत किशोर का कहना है कि वे बिहार राज्य को छोड़कर कहीं भी नहीं जाएंगे। जब उनसे चुनाव लड़ने की बात पुछी गयी तब कहा- कि लड़ाना-जिताना मैं तो रोज करता रहा हुँ। 20 फरवरी २०२० से कार्यक्रम बात बिहार की शुरू करूंगा, ,और इसमें करीब 8 हजार से भी अधिक गांवों से लोगों और युवाओं को चुना भी जाएगा जो आने वाले अगले 10 सालों में बिहार राज्‍य को अग्रणी 10 राज्यों कि गिनती में शुमार करना चाहते हो। 

बिहार राज्‍य को सिर्फ वही चला पायेगा जिसके पास इसका सपना हो। नीतीश कुमार भी अगर इसमें शामिल होते है, तो उन्हे भी स्वागत करते है। नीतीश कुमार से एक सवाल पुछा है कि आप क्या पिछलग्गू बने रहना पसंद करेंगे या फिर आगे आ कर बिहार के लोगो के विकाश के लिए लीड करना पसंद करेंगें।

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